छत्तीसगढ़ के 4,106 गांव हुए टीबी मुक्त, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

छत्तीसगढ़ ने 4,106 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया है। निक्षय-निरामय अभियान की सफलता पर राज्य को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Jul 28, 2025 - 21:48
Jul 28, 2025 - 21:56
छत्तीसगढ़ के 4,106 गांव हुए टीबी मुक्त, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

छत्तीसगढ़ ने टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। राज्य की 4,106 ग्राम पंचायतों को अब टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इस काम के लिए राज्य को केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। यह सफलता निक्षय-निरामय अभियान के तहत मिली है, जिसे राज्य में बड़े पैमाने पर चलाया गया। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर लोगों की जांच की, टीबी के संभावित मरीजों की पहचान की और उनका समय पर इलाज शुरू करवाया गया।

इस अभियान में निक्षय मित्र नाम के एक सिस्टम ने भी बड़ी भूमिका निभाई। इसमें समाज के सामान्य लोग, जनप्रतिनिधि, व्यापारी, सामाजिक संगठन और कर्मचारी शामिल हुए। इन लोगों ने किसी एक मरीज को गोद लिया और इलाज के दौरान उन्हें पोषण, दवा, और भावनात्मक सहयोग दिया। इस तरह मरीजों को न सिर्फ दवा मिली, बल्कि उन्हें समाज का साथ भी मिला, जिससे इलाज का असर और बेहतर हुआ।

स्वास्थ्य विभाग ने हर ज़िले में विशेष टीमें बनाईं। पंचायतों और ग्राम सभाओं के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर जागरूकता फैलाई गई। आशा कार्यकर्ता, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गांवों में जाकर टीबी के लक्षणों की पहचान की। जिन मरीजों को टीबी की पुष्टि हुई, उन्हें तुरंत दवा दी गई और उनका इलाज पूरा होने तक निगरानी की गई।

टीबी मुक्त पंचायतों की पहचान करने के लिए केंद्र सरकार ने तय मानक रखे थे — जैसे कि उस पंचायत में पिछले एक साल से कोई नया टीबी मरीज न मिला हो, पिछले सभी मरीजों का इलाज पूरा हो गया हो और समुदाय में जागरूकता फैली हो। छत्तीसगढ़ ने इन सभी मानकों पर काम किया और 4,106 पंचायतें इन मापदंडों पर खरी उतरीं।

इस अभियान की सफलता को देखकर केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि छत्तीसगढ़ ने बाकी राज्यों के लिए उदाहरण पेश किया है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक पूरा देश टीबी मुक्त हो जाए, जबकि विश्व स्तर पर यह लक्ष्य 2030 है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकती है।

टीबी एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक चलती है और गरीब परिवारों पर इसका असर सबसे ज़्यादा होता है। लेकिन अगर समय पर जांच हो और मरीज को पूरा इलाज और सहयोग मिले, तो यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। छत्तीसगढ़ ने यह दिखा दिया कि सरकार और समाज अगर साथ मिलकर काम करें, तो टीबी जैसी बीमारी को भी जड़ से मिटाया जा सकता है।